

🟥🚨 सहारनपुर में वाहन कटान का बड़ा खुलासा: केवल दो वैध स्क्रैपिंग यार्ड, बाकी सब अवैध? गागलहेड़ी में नियमों की धज्जियां, क्या ‘वाइट कॉलर’ संरक्षण से फल-फूल रहा काला कारोबार! 🚨🟥
♻️ एंड-ऑफ-लाइफ वाहनों के नाम पर खेल? पर्यावरण, कानून और निष्पक्ष व्यापार पर उठे गंभीर सवाल ♻️
सहारनपुर। जिले में पुराने और एंड-ऑफ-लाइफ (ELV) वाहनों के कटान को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। आधिकारिक जानकारी और परिवहन विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, सहारनपुर में केवल दो ही वाहन कटान यार्ड ऐसे हैं जो भारत सरकार की वाहन स्क्रैपिंग नीति के तहत वैध रूप से पंजीकृत और संचालित हैं। इनमें प्रमुख रूप से छज्जपुरा, देहरादून रोड (खसरा नंबर 143) स्थित सिमरन रिसाइक्लिंग्स प्राइवेट लिमिटेड तथा हलालपुर क्षेत्र में स्थित AGP स्क्रैपिंग सर्विसेज LLP को रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फैसिलिटी (RVSF) के रूप में मान्यता प्राप्त है।
ये अधिकृत केंद्र निर्धारित पर्यावरणीय मानकों, प्रदूषण नियंत्रण नियमों, सुरक्षा प्रोटोकॉल और डिजिटल प्रमाणन प्रक्रिया का पालन करते हुए 15 वर्ष से अधिक पुराने वाहनों का वैज्ञानिक तरीके से कटान करते हैं। सरकार की नीति के अनुसार ऐसे वाहनों को स्क्रैप कराने पर वाहन स्वामियों को रोड टैक्स में 75% तक की छूट और लंबित पेनल्टी में 100% तक राहत जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं।
लेकिन सूत्रों का दावा है कि इन दो अधिकृत केंद्रों के अतिरिक्त जिले में संचालित अन्य वाहन कटान यार्ड वैध नहीं हैं। विशेष रूप से थाना गागलहेड़ी क्षेत्र में कुछ स्थानों पर बिना पूर्ण अनुमति और निर्धारित मानकों के वाहन काटे जाने की बात सामने आ रही है। आरोप है कि इन यार्डों में पर्यावरण सुरक्षा उपायों की अनदेखी की जा रही है—न तो प्रदूषण नियंत्रण के मानक अपनाए जा रहे हैं और न ही वाहनों के दस्तावेजों की समुचित जांच हो रही है।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, अवैध रूप से संचालित यार्ड न केवल वैध केंद्रों के लिए अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा कर रहे हैं, बल्कि सरकारी राजस्व को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। वैध RVSF केंद्रों को भारी निवेश, मशीनरी, प्रदूषण नियंत्रण उपकरण और डिजिटल रिकॉर्डिंग प्रणाली के साथ काम करना पड़ता है, जबकि कथित अवैध यार्ड कम लागत पर बिना नियमों का पालन किए सस्ते दामों में वाहन काटकर बाजार में धातु बेच देते हैं। इससे बाजार में असंतुलन की स्थिति बन रही है।
मामले को और गंभीर बनाता है वह आरोप, जिसमें कहा जा रहा है कि गागलहेड़ी क्षेत्र में संचालित कुछ अवैध यार्डों को एक प्रभावशाली ‘वाइट कॉलर’ नेता का संरक्षण प्राप्त है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय चर्चाओं में यह मुद्दा जोर पकड़ रहा है कि राजनीतिक संरक्षण के कारण प्रशासनिक कार्रवाई प्रभावी नहीं हो पा रही।
पूर्व में पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा ढोली खाल बाजार और अन्य क्षेत्रों में अवैध वाहन कटान पर छापेमारी की कार्रवाई की जा चुकी है। विगत वर्ष फाइनेंस कंपनियों से जब्त गाड़ियों को अवैध रूप से काटने के मामले में भी छापा पड़ा था, जिसमें कई कबाड़ियों को गिरफ्तार किया गया। इसके बावजूद समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई।
परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध वाहन कटान केवल आर्थिक या प्रशासनिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण और कानून व्यवस्था से भी जुड़ा विषय है। अवैध यार्डों में तेल, बैटरी, रबर और अन्य खतरनाक अपशिष्ट का सही निस्तारण नहीं होता, जिससे मिट्टी और जल स्रोत प्रदूषित हो सकते हैं। साथ ही, यदि चोरी या विवादित वाहन बिना सत्यापन के स्क्रैप कर दिए जाएं, तो अपराध की जांच प्रभावित हो सकती है।
जिले में अनुमानित 1.6 लाख से अधिक 15 वर्ष पुराने वाहन स्क्रैप नीति के दायरे में आते हैं। यदि इन वाहनों का कटान केवल अधिकृत RVSF केंद्रों के माध्यम से हो, तो न केवल पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित होगा, बल्कि सरकार को राजस्व भी प्राप्त होगा और वाहन स्वामियों को वैधानिक लाभ भी मिलेंगे।
स्थानीय व्यापारियों और जागरूक नागरिकों की मांग है कि प्रशासन गागलहेड़ी क्षेत्र सहित पूरे जिले में विशेष अभियान चलाकर सभी वाहन कटान यार्डों की जांच करे। जिनके पास वैध अनुमति और पंजीकरण नहीं है, उनके विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की जाए। साथ ही, अधिकृत केंद्रों को ही काम करने की अनुमति देकर निष्पक्ष व्यापार का माहौल बनाया जाए।
यह मामला अब केवल अवैध कटान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासनिक पारदर्शिता, पर्यावरण संरक्षण और नीति के सही क्रियान्वयन की परीक्षा बन चुका है। यदि संरक्षण और ढिलाई का खेल जारी रहा तो वैध व्यवसायियों का मनोबल टूटेगा और सरकारी नीति का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।
अब सबकी नजर जिला प्रशासन और पुलिस की आगामी कार्रवाई पर है—क्या गागलहेड़ी क्षेत्र में कथित अवैध संचालन पर सख्त कदम उठाए जाएंगे या मामला यूं ही चर्चाओं तक सीमित रहेगा? आने वाला समय ही इसका जवाब देगा।
संपादक – एलिक सिंह
वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
ब्यूरो प्रमुख – दैनिक आशंका बुलेटिन, सहारनपुर
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